भारत ने बुधवार देर रात रेल पर तैनात विशेष रूप से डिजाइन किए गए मोबाइल लॉन्चर से अग्नि-प्राइम मिसाइल का परीक्षण किया। यह सिस्टम कैनिस्टराइज्ड लॉन्चिंग तकनीक पर आधारित है और परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से किया गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस परीक्षण की जानकारी दी और बताया कि यह ट्रेन देश के उन भीतरी इलाकों तक भी जा सकती है जहाँ रेल लाइन मौजूद है।
राजनाथ सिंह के अनुसार, यह रेल-आधारित मोबाइल लॉन्चर अपनी श्रेणी का पहला सिस्टम है जो अलग-अलग प्रकार के रेल नेटवर्क पर चल सकता है। इसकी मदद से मिसाइल को रात के अंधेरे या धुंध वाले इलाकों से भी तीव्रता से लॉन्च किया जा सकता है, जिससे तैनाती और संचालन दोनों में लचीलापन मिलता है।
कैनिस्टराइज्ड लॉन्च सिस्टम क्या है
कैनिस्टराइज्ड लॉन्च सिस्टम में मिसाइल को एक मजबूत धातु के कंटेनर (कैनिस्टर) में रखा जाता है। यह कैनिस्टर मिसाइल को नमी, धूल और अन्य प्रतिकूल मौसम से सुरक्षित रखता है और लंबे समय तक तैयार स्थिति में रखने में मदद करता है। कैनिस्टर से मिसाइल को बिना लंबी तैयारी के त्वरित रूप से लॉन्च किया जा सकता है — और इसे ट्रक, रेल या अन्य मोबाइल प्लेटफॉर्म पर ले जाया जा सकता है। इससे दुश्मन के लिए यह पहचानना मुश्किल हो जाता है कि कौन सा कंटेनर सक्रिय मिसाइल रखता है और कौन सा नहीं, साथ ही रखरखाव की आवश्यकता भी कम हो जाती है।
अग्नि-प्राइम के बारे में
अग्नि-प्राइम अग्नि परिवार की आधुनिक मिसाइलों में से एक है। इसे जून 2021 में परीक्षण के दौरान प्रदर्शित किया गया था। इसकी डिजाइन लगभग 2000 किलोमीटर तक की मारक क्षमता के लिए की गई है और यह परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के विकास कार्य से यह मिसाइल हल्का वज़न और उच्च गतिशीलता वाली है तथा मोबाइल लॉन्चर से भी दागी जा सकती है। यह दो-स्टेज सॉलिड-फ्यूल प्रणोदन पर आधारित है और इसका मार्गदर्शन (गाइडेंस) सिस्टम इलेक्ट्रोमैकेनिकल एक्टुएटर्स से लैस है। अग्नि-प्राइम को अग्नि-4 (लगभग 4000 किमी) और अग्नि-5 (लगभग 5000 किमी) जैसी लंबी दूरी वाली तकनीकों के अनुभव से विकसित किया गया है।
भारत इससे पहले भी विभिन्न प्लेटफॉर्म — जैसे ड्रोन — से मिसाइल परीक्षण कर चुका है। दुनियाभर में रूस, चीन और उत्तर कोरिया ने रेल-मोन्टेड मोबाइल लॉन्चर के परीक्षण किए हैं; अमेरिका का नाम सूची में अक्सर आता है पर उसने आधिकारिक पुष्टि नहीं दी है। इस सफल परीक्षण के साथ भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जिनके पास रेल नेटवर्क से मिसाइल लॉन्च करने की यह क्षमता मौजूद है।
पृष्ठभूमि
अग्नि श्रृंखला की पहली परीक्षण उड़ान 1989 में हुई थी; उस समय इसकी मारक क्षमता 700–900 किमी के बीच थी। 2004 में अग्नि श्रृंखला की मिसाइलों को सेना में शामिल किया गया। तब से भारत ने अग्नि परिवार की कई मिसाइल सफलतापूर्वक लॉन्च की हैं।
